भूरी बाई को पद्मश्री से नवाजा गया

 भूरी बाई को पद्मश्री से नवाजा गया



मध्य प्रदेश के जिला झाबुआ की भरी बाई को इस बार पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया। मध्यप्रदेश में झाबुआ जिले के पिटोल गांव में जन्मी भूरी बाई भारत के सबसे बड़े आदिवासी समूह, शिखर सम्मान  द्वारा कलाकारों को दिया गया सर्वोच्च राजकीय सम्मान सहित कई पुरस्कार जीते हैं।

पिटोल की भूरी बाई अपनी चित्रकारी के कारण लिए कागज और कैनवास का इस्तेमाल करने वाली प्रथम भील कलाकार है। भारत भवन के तत्कालीन निर्देश जय स्वामीनाथा ने होने कागज पर चित्र बनाने के लिए कहा भूरी बाई ने अपना सफर एक समय कालीन भील कलाकार के रूप में शुरू किया भूरी बाई अब भोपाल में आदिवासी लोक कला अकादमी में एक कलाकार के तौर पर काम करती हैं। उन्हें मध्य प्रदेश सरकार से सर्वोच्च पुरस्कार शिखर सम्मान 1986-87 प्राप्त हुआ है 1998 में मध्य प्रदेश सरकार ने उन्हें अहिल्या सम्मान से विभूषित किया 



उनके चित्रों में जंगल में जानवर, वन और उसके वृक्षों की शांति तथा गाटला स्मारक, स्तंभ भील देवी, देवी-देवताओं पोशाक गाने और टैटू झोपड़ियों अन्ना गार हॉट उत्सव तथा नृत्य और मौखिक कथाओं सहित भील के जीवन के प्रत्येक पहलू के सम्मानित  किया गया है ।भूरी बाई ने हाल ही में वृक्षों और जानवरों के साथ-साथ वायुयान टेलीविजन कार तथा बसों का चित्र बनाना शुरू किया है


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